Monday, August 2, 2021

मिले जब जब हम

मिले जब जब हम
तेरी खुशबू लिये चला आता हूँ
वो आंखे वो हँसी
समेटे दिल मे अमीर बनकर चला आता हूँ

वो मिलने से पहले धड़कती धड़कन
वो मिलने पर नजरो की बाते
वो मिलने के बाद दिल का सुकून
वो सुकून लिए चला आता हूँ

कसक सी रह जाती हैं
वक़्त तो भागता सा लगता हैं
मिले बैठे कुछ पल ही बीतते हैं
बात अधूरी ही हरबार होती हैं

तुझे जी भरकर देख पाता नही
तेरे रूप को दिल में भर पाता नही
नजरो से नजर हटती ही नही
बस तेरी साँस से टकरा भर पाता हूँ

कुछ कर की सपने हकीकत बने
ये मिलने के मौके किस्से बने
थाम के हाथ कुछ आगे बने
पर सुना नही कभी की सपने हकीकत बने

जिस दुनिया में तू नही

अपनी दुनिया में रहने वाले
कुछ दुनिया की भी खबर ले
ऐसा क्या तेरे साथ हुआ
की तेरा साथ ही छूट रहा

फिक्र कर अपनी भी
अपनो की कोई बात नही
पर देख उनको भी 
जो तुझे अपना मान बैठे

तेरी दुनिया में तो कुछ
फर्क कहा हैं
जिस दुनिया में तू नही
उसे भी देखले

क्या मिल पाओगी

एक अधूरा से दिन फिर
एक बेहद लंबे इंतजार के बाद खत्म हुआ
वक्त ही न मिला मेरे दोस्त को
कुछ बोलने के लिऐ

सब कुछ किया होगा
जो जरूरी भी होगा और जायज भी
नही एहसास हुआ होगा 
कोई ढूंढता तेरी परछाई होगा

इन हालात में
में नही था
कही रहा हूँगा 
पर तेरा नही था

दूर था तो दूर ही रखखा
साथ की गुंजाइश न रही होगी शायद

कुछ पलों का साथ 
कुछ थोड़ी सी बात
कसक होती तो कुछ  कर ही लेता
इतना बेखबर तो तू यू नही होता

ये क्या राह तूने दिखाई है
ऐसी पाबंदियां की बंदिशें बनाई हैं
कुछ बेवजह सी क्या 
सजा सुनाई हैं

इतनी प्यास क्या सोच कर जगाई थी
नही मुमकिन था तो 
क्यों आये थे
बिना बात के दिल लगाए थे

तेरी पाबंदियों की हद क्या हैं
कब तक यूं ही दिल बचाओगी
कोई वक्त हैं जब मुझसे
मिल पाओगी

इन्तेजार का मोल

ये जो वक्त हैं बड़ा अजीब हैं
जब दिल का हो तो कम पड़ता हैं
जब इंतेजार हो तो 
भारी पड़ता हैं

इस इन्तेजार की भी 
अलग कहानी हैं 
किसी का करना हो तो
हर पल बड़ा हो जाता हैं
जब किसी को करवाना हो तो
इसका मोल ही नहीं होता

ये इन्तेजार भी लंबा हो रहा हैं
कितना लंबा पता नही
कुछ पल मिल भी जाये तो क्या
कुछ हो भी जाये तो क्या

विडंबना

मरा मच्छर तो खून बहा होगा
किस किस का पिये बैठा होगा
समाजी रहा होगा
समाज का पिया होगा

मच्छर मार के क्या खोया
क्या पाया
वो मच्छर था क्या उसका दोष था
सबका खून मिला होगा

मरे मच्छर के साथ
बहा दिया
खून समाज का ही बहा दिया

निरंकुश प्रहार हैं
प्रहसन का भार हैं

मेरे नादान यार

कितने नादान मेरे यार है 
बेखबर से 
कोई आके उनका 
दिल चुरा गया

वो सोचते है अब
दिल कही लगता
क्यो नही

ये सोचते
जी हमारा घबराए
उन्हें पता भी हैं
उन्हें इश्क हैं

इस इश्क़ में 
कई फना हो गये
इश्क शौक
महंगा हैं

पाबंदियां और बंदिशे

ये क्या वक़्त हो चला है
तुझे याद करने पर भी पाबंदियां हो गई है
देखना तो नसीब से परे 
आवाज पे भी ताले पड़ गये हैं

ये क्यो होता हैं की जब 
तुझे चाहने की हसरते उमड़ती हैं
तुझे मुझसे और दूर करने की
साजिश होती हैं

तेरी जिंदगी में 
मेरा वक़्त कम हो रहा है
क्या तुझ बेख़बर को 
एहसास भी होता हैं

इतना मगरूर तो तू 
वैसे न था
क्या मेरे होने से 
दिक्कत हो रही है

कोई इशारा तो कर मुझे
में कोशिश करूंगा
मेरे साये से भी तुझे
महफूज रखूंगा

इस तखलीफ़ का 
कोई मलहम तो बता
कैसे खयाल तेरे 
दिल से जुदा हो जाये

कुछ रहम कर 
पत्थर ना चला
खंजर से चुभते 
अरमान मेरे