वो हल्के से तू उछली तो लगा
घुंगरू झनक गये
अगर पैरो में पायल होती
तो खनक जाती
वो हाथोँ से कुछ मचलती लटों
तो हल्के से हटा देना
अगर फूलो की लड़ी होती
तो बिखर जाती
वो फिर हल्के से मुस्कुरा कर
हवा में हाथों से मिठ्ठी बनाना
अगर सामने दिल होता तो
कैसे संभल पता
अपनी शरारतों पे फिर
तेरा अंत में शर्मा जाना
वो होंठो से शर्मीली
हँसी का रह जाना
तुझे यूँ देखकर मन पर काबू नहीं रहता
तेरे पास आकर तुझे करीब से देखने की ललक
कुछ है तेरे रूप के सागर मैं
हद तोड़कर बाहों में भरने को आतुर
यूँ किश्तों में तेरा मिलना
प्यास मिलने की और बढ़ा देता हैं
करते हैं शांत दिल को हम किसी तरह
पर हर बार हम दिल हार जाते हैं